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गुर्दे जानकारी गाइड - अन्य विषय

गुर्दे / गुर्दे-रोग से संबंधित अन्य जानकारीपूर्ण विषय

गुर्दे और स्वास्थ्य


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गुर्दे क्या है? 

अधिक तम लोगों को दो गुर्दे होते है। वे पीठ के बीच में पंजार के ठीक नीचे स्थित होते है। हर गुर्दे का वजन करील करीन १५० ग्रै. होता है तथा उसका नाप इन्सान के मुढी जितना होता है। उसका आकार बीन (सेम, बीन की सब्जी) जैसा होता है और रंग लालसर भूरा होता है।  

गुर्दे शरीर में महत्वपूर्ण कार्य करता है जिसका असर पूरे शरीर पर होता है।  

गुर्दे क्या करते है? 

शरीर में गुरदों के चार महत्वपूर्ण कार्य है।  

  • शरीर से अपशिट सामग्री बाहर निकालर । जो पोाक तत्व शरीर इस्तेमाल नही कर सकता, वे जहरी ले बन जाते है। गुर्दे खून की छाननी करके उन्हें मूत्र द्वारा शरीर से बाहर निकाल देते है  
  • शरीर से अतिरिकत पानी हटा देते है। 
  • शरीर में महत्वपूर्ण हार्मोन्स की निर्मिती तथा नियंत्रण करते है। ये हार्मोन्स लाल खून कोशिकाओंकी निर्मिती को नियंत्रित करते है, रक्तचाप नियंत्रित करते है तथा मजबूत रहने में मदद करते है।
  • नमक, पानी तथा शरीर में संचरण करनेवाले अन्य रसायनों को नियंत्रित करके शरीर का रसायन शास्त्र नियंत्रित करते है।  

कौन सी बीमारियाँ गुरदोंका कार्य बंद कर सकती है?  

विभिन्न बीमारियों का गुरदों के कार्य पर असर होता है। इनमें शामिल है:  

  • उच्च रक्तचाप
  • मधुमेह 
  • गुर्दे की आनुवंशिक बीमारिया 
     
  • सूजन युक्त तकलीफ देह गुर्दे (जिसे ने प्रयटीस कहते है) 
     
  • गुरदों का विक्षत होना (मूत्राशय से मूत्र के उल्टे प्रवाह की वजह से) अथवा एन्रोनेट गुर्दे इजेक्शन
  • निम्नस्तरीय मुत्रनालिका प्रणालीयें रोगाणु ग्रस्तता उदा. रोगाणुग्रस्त मुत्राशय  
  • दवाईयों के ऊन परिणामों के कारण गुरदों की खरुली, विशेाकर सरदर्द पीठ दर्द, जोडों के दर्द के लिए ली गई वेदना शयक दवाईयाँ  
  • दवाईयों के देशी प्रणाली में इस्तेमाल होने वाले जडी बुटी खनिज से वने दवाईयों का इस्तेमाल

खनिज से वने दवाईयों का इस्तेमाल इनका गुरदों पर अलग अलग असर होता है । अगर आप को ईनमे से किसी भी स्थिती का अनुभव होता हो, तो अपने चिकीत्सक से गुरदों पर होनेवाले दीर्धकालिक असर के तारे मेस सलाह ले ।

गुर्दे की बीमारी लक्षण क्या होते है ?

गुर्दे की बीमारी के चिन्ह तथा लक्षण व्यक्तीनिहाय विभिन्न होते है । प्रारंाभीक लक्षण साधरण हो सकते है, जिनमें समाविष् ट है ।

  • पेशाब की मात्रा तथा बारंबारता में बदलाव, खासकत रात में  
  • पेशब करते समय वेदना तथा जलन 
  • पेशाब में खून  
  • आँखे तथा हरवनो में सुजन  
  • गुर्दे के क्षेत्र में वेदना  
  • थकान 
  • उच्च रक्तचाप

कई बार गुर्दे की बीमारी के कोई लक्षण नही दिखाई देते । यह असाधारण तात नही कि बिना कोई लक्षण बताये हुए लोगोइ के ७० प्रतिशत गुरदों का काई रुक जाता है। .

गुरदों की संरचना

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गुर्दे जोडों का अवदव है जिसके अनेक कार्य होते है। ये कइ तरह के जानवरों मेरुदंड सहित जानवरों का समावेश करके तथा कुछ मेरुदंड रहित जानवरो बी दिखाई देते है। ये मुत्रप्रणाली का आवशय अंग है और साथ ही शरीर में आम्ल- आम्लारीका संतुलन बनाये रखना, बिधुत् वाहकों कस तथा रक्तचाप का नियंत्रण जैसे कार्य भी करते है । ये शरीर में खून के नैसर्गिक धन्नीका कार्य करते है और अदाशिष् ट को अलग कर देते है जो मूत्राशय की तरफ जाते है। मूत्रकी ििनर्मिती में गुर्दे युरिया तथा अमेनियम जैसे अदशिष् ट को त्याग देते है गुर्दे पानी, ग्लूकोज तथा अमोनिया जैसे अपशिष् टअम्ला को पुनरच सोंख लेने को भी जिम्मेदार होते है। गुर्दे व@Àाल्सीट्रौल, रेनिन तथा ईथ्र्रेप्रोटीन नामक हार्मौन्स की भी निर्मीती करते है । पेटके कन्दरे में


पश्चपर्युदय मे स्थित गुरदों को वॄककीद धमनी के जोडे से खुन प्राप्त होता है तथा उनसे वॄककीद नस के जोडेमें खून जाता है. प्रत्येक गुर्दे मूत्रनलिकाम जो स्वयं एक जोड रचना है, सूत्र त्याग देता है, जहाँसे मूत्रनलिका उसे सूत्राशद में खाली कराती है. गुर्देकी बीमारियाँ विभिन्न होती है, लेकिन गुर्दे की बीमारी से पीडित व्यक्ति बारबार चिकित्सासंबधित अभिलक्षण दर्शाते है. गुर्दे की साधारण चिकित्सासंबधित भीrमारियों में नेत्रदाईक और नेप्रÀा@टिक लक्षणोंकजा शयुच्रय, वृक्कीय गाँव, गुर्दे की गंभीर कोट, दीर्धकालिक गुर्दे की बीमारी, मूत्रनालिकायें रोगाणूसंचार, नेफोलिििथसिस तथा मुत्रनलिका मार्ग में रुकावट आदिका समावेश है। (१)गुर्दे के विभिन्न प्रकार के वैंÀसर मौजूद है जिनमें वयस्कों में साधारणत: वृक्कीय वैंÀसर इस्त्रेनल कोशिका कार्सोनिया पाया जाता है। वैंÀसर, गाँठ और कुछ अन्य वृक्कीय स्थितियों का प्रबंधन गुर्दे के निकालाने से या नेप्रÀेक्ठा@मी द्वारा हो सकता है ।

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जब वृक्कीय कार्य, वृक्कीय धमनीके छन्नोका दर से मापन किया हुआ, निरंतर दुर्दग्रस्त हो, डायलासिस तथा गुर्दे का प्रत्यारोपण ये उपचारों के विकल्प हो सकते है। यद्यामि वे इतने गंभीर पीडादायाक नही. पथरी भी वेदनामय और परेशानीदायाक हो सकती है। पथरी के इलाज में ध्वनिलाहती उपचार समानिए है, जिसमे पथरी के छोटे छोटे टुकडे होकर वे मूत्र द्वारा निकल जाते है। पथरी के सामान्य लक्षण में नीचले पीठ के मध्य भाग में कडी वेदना महसूस होली है । सामान्य: आदमी एक गुर्दे वेदना महसूस होती है।अदमी एक गुर्दे के साथ जी सकता है। क्योंकि जिंदा रहने के लिए आवश्यक वृक्कीय कोशिकासम्होंये ज्यादा कार्यरत होते है। जब गुर्देके कोशिका समूहों का कार्य बहुत ही अधिक मात्रा में बिगड जाता है, तब ही दीर्घकालिक गुर्दे की बीमारी शुरू होती है । डायलासिस के जरिये वृवकीय प्रति स्थापना उपचार अथवा गुर्देका प्रत्यारोपण तब जरूरी होता है जब खून के छन्न होने का दर बहुत ही घट गया है अथवा वृवकीय कार्य की अनियमितता गंभीर लक्षण बता रही है ।


दीर्घकालिक गुर्देकी बीमारी से त्रस्त बच्चे: माता – पिता को सलाह

अगर आपके बच्चे को दीर्घकालिक गुर्दे की बीमारी का निदान किया गया हो, तो इसमे कोई संदेह नही कि अत्याधिक पीडा तथा किंकर्तव्यभ्ढता महसूस करते होंगे । ये सामान्य भावनाऐँ है । और एक बार आप जान गयें कि आपके बच्चे की बीमारी यह वास्तविकता है, जिसे परिवार को स्वीकार करना पडेगा,आप इसके दिन-ब-दिन पहलू से सफलतापूर्वक निपटने के लिए व्यावहारिक मार्ग विकसित कर सkोंÀगे । यहँा कुछ चीजें है जो दूसरों को उपयुक्त साबित हुई ।

गुर्दे का शरीर क्रिया विज्ञान

गुर्दे का शरीर क्रिया विज्ञान

 

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वृककीय शरीर विज्ञान गुर्दे के कार्य का अध्ययन है , जब कि नेप्ालजि गुर्दे की बीमारियों से संबंधित चिकित्सा विशेष् ा है ।

गुर्दे पूरे शरीर के समसिथती में हिस्सा लेते है,आम्लारि समसिथती नियंत्रित करना,विधुतवाहकता नियंत्रण,कोशिका से अधिक तरल पदार्थ तथा रक्तचाप नियंत्रित करते है । गुर्दे यह शरीर को समस्थिती में रखने का कार्य स्वतंत्र रीति से करते है तथा अन्य अवयवों के साथ,खासकर अंत:स्त्रावी कार्य में समन्वय स्थापित करते है ,जिनमें रेनिन,अँजिओटेनिसन ।।, एल्डोस्टेरान,अँटीडाययुरेटिक हार्मोन्स तथा आर्टियल ऩट्रीयुरेटिक पेप्टाईड अन्य के साथ समाविष् ट है ।

बहुतांश गुर्दे के कार्य छानना,पुन: अवशोष् ान तथा द्रव निकलने जैसे सादे क्रियाविधी से होते है,जो नेप्रÀा@न में संपन्न होते है । छन्ना, जोकि वृक्कीय रक्त काणिका में होती है, एक ऐसी क्रिया है जिससे कोशिका तथा बडे पोणक द्रव्य खून से छाने जाते है। जिनके उपशिष् ट से मूत्र बन जाता है। गुर्दे दिनो १८० लिटर छनो द्रव्या निर्मिती करता है। जबकि इसमे से ज्यादा पुन: सोख लिया जाता है। ओर करीबन सिर्फ २ लिटर मूत्र की निर्मिती होती है। पुन: सोख लेनेका मतलब छनो इसके रेणू की यातायात और खूनों सोखना। द्रव निकलना इसके विपरित प्रक्रिया है रेणू की यातायात विरुद्ध दिसामें खून से मुत्र तक होती है।

अयशिष् ट सामग्री (मलमूत्र) का त्याग करना

गूरदे चयापचयन क्रिया में निर्मिती अयशिष् ट सामग्री को त्याग देते है। इस अपशिष् ट सामग्रीमें व@Àटाबोलिद्रय, प्रोटिन के चयपचयन से निर्मिती दुरिया जैसे नादट्ोजनयुक्त द्रव्य, और न्यूकलीक आस्ल के चयापचयन मे निर्मिती युस्कि अरिुड का रुमादेश होता है।

अम्ला- अभ्लारि समन्वयन

गुर्दे और फेफडे दो अवयतोकी प्रणाली अम्ला – आम्लारि समतलको वनाये रखती है, जिससे पी एक मूल्य वैलनिक रितीमें करीबन स्दिर होता है । गुर्दे नायकार्बेनेट की तीब्रता नियंत्रित करके आम्ल- आम्लरि समन्वयदमें मदद करते है।

द्रव संक्रमण का नियंत्रण

प्लाझमा संक्रमण का नियंत्रण में महत्वपूण वृद्दि-हट अधÞचेतक से पहचाने जाते है, जो पिटयुस्री ग्रंदियों से अ@टीडायुरेटिक हार्मोन (यु डी एच)स्त्राव होना शुरु होता है, जिसके परिणाम स्वरुप गुर्दे पानी का पुर्नशोष् ाण करता है जिसके मूत्र की नीव्रता बढती है। दोनो घटक एकसाथ प्लाझमा संक्रमण को सामान्य स्थितीमें लाते है।

दुरिया सामान्त : गुरदों से अपशिष् ट गुरदों से अपशिष् ट सामग्री के स्वरुप में त्याग दिया जाता है। लेकिन जब खून में प्लाझमा की मात्रा कम हो और एडी एच समन्वयन द्रव बना रहा हो जो कि पानी को खींचे ले, युरिया नेप्रÀा@न में फिरसे दाखिल होकर निकल सकता है या फिरसे उसका चक्रीय चलन एडी एच ऊपतक मौजूद है या नदी उसपर मिर्भर होके चालू रहना है।

रक्तचाप का नियंत्रण

रक्तचाप का दीर्घ का लिक नियंत्रण स्पष् ट तथा गुरदों पर निर्भर करता है। यह मुख्दत : अतिरिक्त कोशिश तरल हिस्से द्ववारा होता है, जिसका आकार प्लाझमा सोडियाम के kोंÀद्रीकरण पर निर्भर होता है। यद्यपि गुर्दे रक्तचाप को प्रत्यक्ष परख नही सकते, सोडियम तथा क्लोराइड के नेप्रÀा@न के दूरस्थ अंगथो वितरण में बदलाव गुर्दे से रेनिन नायक एन्पिए का स्राव का होता है। इसी तरह जन अतिरिकत कोशिश द्रव का खाना सिकुडता है और रक्तचाप घट जाता है, सोडियम तथा क्लोरांड का वितरण घट जाता है और जबाब में रेनिन का स्राव बढता है।

हार्मोन्स का स्त्रवण

गुर्दे विभिन्न हार्मोन्स जैसे कि ईर्थोप्रोटीन, कौल्सिट्रॉल तथा रेनिन का स्त्रवण करते है। ( कोशिश समूदों के स्तर पर नीचे स्तर का ॲक्सिजन) हायपेक्तिया के प्रतिव्र्िद्धिंया के रुपमें ईर्थोप्रोटीन वृक्कीय परिचालन में मुक्त होता है। यह अस्थियज्जा में ईर्द्रोपॉयसिस (लाल कोशिश खून की लाल कोशिकाओं की निर्मिती ) को उदीपित करता है। कॅल्सिट्रॉल विटॅमिन डीका सक्रिय प्ररुप, कॅल्शिदय के आंत में शोष् ाण को बढावा देता है तथा फॉस्फेट के गुर्दे में पुनर्शोष् ाण में भी सहायक होता है। रेनिन अँजिओटोान्सिन ॲल्डोस्टेरॅान प्रणलीका हिस्सा, सहायक, रेनिन ॲल्डोस्टेरॅान स्तर पर शमिल होता है।

पथरी

पथरी की बीमारी कितनी सामान्य है?

हर साल, पाँच लाख से भी अधिक लोग पथरी की बीमारी की वजह से आपत्कालीन कक्ष में लाये जाते है। ऐसा सोचा जाता है कि हर दस में से एक आदमीं को अपनी जिंदगी में कभी ना कभी पथरी की बीमारी का सामना करना पाडेगा। kidney_stone_1

पथरी के लिए प्रबलतम उम्र २० साल से ५० साल तक है। णर्दों में पथरी की बीमारी होने की संभावना औरतों से अधिक रहती है। अन्द बीमारीयाँ जैसे उच्र रक्तचाप, मधुमेह, स्थूलता, अस्थिसुषि् ारता, दीर्धकालिक अतिसार अथवा गुर्दे की खोखली गाँव से पथरी के खतरे की संभावना बढाती है। मधुमेह पथरी की बीमारी होने की संभावना, खासकर युवा महिलाओंमें अधिक बढाती है। जिन के परिवारिक पार्श्वभूमी में पथरी की बीमारी हो, उनमें से सिर्फ २५ प्रतिशन लोगों में ही यह बीमारी पायी जाती है। चिकित्सकों का कहना है कि उन्हें बच्चों मे पथरी की बीमारी अधिक मात्रा में दिखाई दे ही है। ब@रैटिक शल्पकर्म (वजन घटानेवाले) के बार पाचक मार्ग में बदलाव आता है, तब सामान्यत: पथरी की बीमारी पाई जाती है। इस शल्पकर्म के बाद आ@क्यिलेट का स्तर बढता है।

पथरी क्या है?

पथरी म़ूत्र में स्थित रसायनों से बना एक कठीन पदार्थ है। मूत्र में विभिन्न अपशिष् ट घुले हुए रहते हे। जन कम तरल पदार्थ में ज्यादा अपशिष् ट घुले हुए हो, तो उनके स्फटिक बनने लगते हे। स्फटिक अन्य तत्वोंको आकषि् ार्त करते है तथा उनके साथ जुडकर ठोस पदार्थ बनाता है, जो अगर मूत्र के द्वारा शरीर के बादर नदी पेंÀका गया तो बडा हो जाता है। सामान्यत: गुर्दे इन रसायनों को मूत्र द्वारा हटा देते है। बहुतांश व्यक्तियों में कापी मात्रा में मौजूद द्रव पदार्थ इन्हें धो डालता है अथवा मूत्र में मौजूद अन्य रसायन पथरी के निर्माण को रोक देते है। व@Àल्शियम, अक्झिलेट, युरटे, सायस्टीन, झँथीन तथा फा@स्फेट इन रसायनों के कारण पथरी की निर्मिती होती है।

निर्माण होने के बारे पथरी गुर्दे मे मौजूद रहती है। अथवा मूत्रप्रणाली से सफर करते हुए मूत्राशय तक kidney_stone_2पहुच जाती है। कभी कभी छोती छोती पथरी सफर करने करते ज्यादा तर तकलीफ न देने हुए मूत्र द्वारा शरीर से बाहर जाती है, लेकिन जो पथरी जगह नदी छोड रही, मूत्र को गुर्दे, मूत्राशय मूत्रपिण्ड अथवा मूत्रमार्ग में पीछे हरा सकती है, जिससे पीडा महसूस होती है।

संभावित कारणों में बहुत कम पानी पीना कसरत (बहुत ज्यादा या बहुत कम), स्थूलता,वजन घटानेका शल्यकर्म अथवा बहुत ज्यादा नमक या शक्कर युक्त खाद्यपदार्थ खाना आदि समाविष् ट है। बहुत अधिक मात्रा में प्रक्टोज खाने का पथरी की बीमसरी होने की संभावना को खरते से संबंध हो सकता है। प्रÀक्रोज मेज शक्कर में तथा उच्च प्रÀूकरोज मक्केकी चासनी आदि में अधिक माा में पाया जाता है । कुछ व्यक्तियोइ में प्रÀुकटोज चयापचय से अक्झिलेट बनना है।

बहुतांश व्यक्तियों मे ये सामान्यतया कारण होते है। इतिहास के दौरान पथरी पायी जाती है। वैज्ञ्यनिकों को शात हजार वष् ार् पूर्व की इजिशियन ममी में पथरी के सबून मिले है।

पथरी लक्षण क्या है।
कोई पथरी वालु के छोते कण जितने छोते होते है तो कोई रोडी जितनी बडी होती है। कुछ कम तो गोल्फ के गेंद के आकार का होता है। सामान्य सिद्दान्त है। कि पथरी जितनी बडी, उतने लक्षण सहजही दिखाई पडते है।

ये लक्षण निम्नििलखित में एक या अधिक हि सकते है। : kidney_stone_pain

१  पीठ के नीचे दोनो बाजु में कष् टप्रद वेदना

२  अधिक मात्रा में अनिशिचत दर्द अथवा कमतदर्द जो जाता न हो ।

३  पेशाब में खून जान

४  नौशिया अथवा उलटी, वमन

५  बुखार तथा सर्दी- जुकाम

६  दुर्गंध आनेवाला अथवा भूरे रंग की पेशब

पथरी तब तकलीफ देना शुरु करती है, जब वह अवरोध या जलना का कारण बनती है । यह बहुत जल्दी ही चरम पीड निर्माण करती है। बहुत सारे मामलों से पथरी बिना कोई निकसान पहुँचए लेकिन अति वेदना देते हुए निकल जाती है। छोटी पथरी के लिए पथरी शमक देना यही एक इलाज हो सकता है। कुछ पथरी, जिनके लक्षण बने रहते है अथवा उनमें अन्य जहिलता होती है। एसके लिए अन्य इलाज आवश्यक होरे है। यद्यपि गंभीर मामलों में शल्यक्रिया आवश्यक ाहो सकती है।

अगर मुझमें ये लक्षण दिखाई दे और मुझे पथरी होने की आशंका होनेपर मुझे क्या करना चाहिए?
जितना जल्दिहो सके, चिकिलकसे मिलिए आपको मूत्रमें से पथरी बाहर निकालने के लिए अधिक मात्रा में तरल पदार्थ पीने की सलाह मिल सकती है।

गुर्दे प्रत्यारोपण के लिए क्या और क्या न करें

गुर्दे प्रत्यारोपण एक शल्यक्रिय कर्म है, जिसमें स्वस्थ, दान दिया हुआ गुर्दे निकाली हुए गुर्दे के रुग्गमें स्थापित की जाती है। वह गुर्दे की बीमारी के अंतिम अवस्था (इ एम आर डी) के इलाजका डायलसिस के सिवा अन्य विकल्प है। दान किया हुआ गुर्दे रुग्णकेनाकाम गुर्दे जो कार्य नदी कर सकते सकते, वे सभी कार्य कर सकता है। एक बार रुग्णने गुर्दे प्रत्यारोपण करना निशिचत किया, तो प्रत्यारोपण मूल्याकन प्रक्रिया शुरु की जाती है। गुर्दे प्रत्यारोपण के प्रकार

प्रत्यारोपण के लिए गुर्दे दो स्त्रोतों से आते है।

  • जिवित दाते

     परिवार के सदस्य ( मारा, पिता, भाईया लहन),जीवनसाथी और बच्चे जो कम से १८ साता के हो।


    निम्नििलखित कारणों के लिए जिवित दातों से प्रत्यारोपण को प्रोत्साहित किया जाता है। :


    • अपका एक खून का रिश्तेदार निकटतम आनुवाशिक जोड हो सकता है। जिवित दातोंके प्रत्यारोपण में दीर्धकालिन सफलता दर उत्कृट होता है।
    • जिवित दाता का गुर्दे शल्यक्रिया से निकाला जाता है। इससे मृत शरीर के गुर्दे मिलाने तक का प्रतीक्षा समय खत्म हि जाता है।
    • जिवित दाता से प्रत्यारोपित किया हुआ गुर्दे तुरंत कार्य शुरु करेगा इसकी संभावना अधिक होती है, क्योकी दाता का गुर्दे खूान विराहित स्थिती में बहुत कम समय रहता है।

      दाताओ का सतर्कपूर्वक मूल्यांकन किया जाता है और उसके वाद ही दाता स्वीकार्य होता है।

  • मृत शरीर दाता

     जो लोग मर गये है और जिन्होने अपने अवश्व दान किये है। अगर आपको प्रत्यारोपण के लिए मान्यता मिली है और अपके पास कोइ जिवित दाता नही है अथवा आप जिवित दाता के वारे में अनिश्चित है, तो आपको मृतशरीर दाताओं के प्रतीक्षा सूची में शामिल किया जाएगा। एक बार आपको प्रत्यारोपण के लिए स्वीकार किया जाता है, तल आपका नाम राष् ट्रीय प्रतीक्षा सूची में शामिल किया जाता है। जब गुर्दे उपल्यब्ध होता है तब उस गुर्दे के लिए ऊत्युत्तम आनुयांशिक जोड की खोज की जाती है। जिसपर प्रत्यारोपण होनेवाला है, उसे सूचित किया जाता है और प्रत्यारोपण किया जाता है।

गुर्दे प्रत्यारोपण

  गुर्दे प्रत्यारोपण के बारे में मूझे जो जानना चाहिए, वो सब

गुर्दे प्रत्यारोपण एक शल्यक्रिय कर्म है जिसमें जिसका गुर्दे निकाली हुआ है, ऐसी रुग्णके शरीर में दान की किया गया स्वसस्थ गुर्दे बिठाया जाता है। अंतिम चरण गुर्दे की बीमारी (इ एम आर डी) के इलाज के लिए डायलसिस के सिवा यह एक अन्य विकल्प है। रुग्ण का निकाली गुर्दे जो कार्य नदी कर सकता, के सभी कार्य दान किया गया गुर्दे कर सकता है एक बार रुग्ण ने गुर्दे प्रत्यारोपण करना निश्चित किर्या, वे प्रत्यारोपण मूल्यांकन प्रक्रिया शुरु करते है।

प्रत्यारोपण के लिए गुर्दे दो स्त्रोतों से आते है :
  • जिवित दाता
    परिवार के सदस्य ( माता, पिता,भाई, बहन), पती, पत्नी और बच्चो, जिनको उभ्र कमसे कम १८ साल हो जिवित दाता से प्रत्यारोपण को निम्नलिखित कारणों को लिए प्रोत्साहित किया जाता है।  
    • हमारे खून के रिश्ते दारों में से एक निकट तम आनुवंशिक जोट हो सकता है। जिवित दाता गुर्दे प्रतसिपण का दीर्घ का लीन सफलता का दर उत्कृष् ट है।
    • जिविन दाता का गुर्दे नियोजन बध्द शल्पक्रिया से निकाला जाता है, जिससे मृत शरीर के दाता का प्रतीक्षा समय नष् ट होता है।
    • जिवित दाता प्रत्यारोपण के पश्चात आपका गुर्दे तुरंत कार्य करना शुरु कर देगा इसकी संभावना अधिक होती है क्योंकि वह बहुत कम समय खून के सिवाय रहा है।

      दाताओंका सतर्कता से मूल्याकंन करने के बार ही उन्हें दाता के रुप में स्वीकार किया जाता है।

  • मृत शरीर दाता
    जो लोग मृत हुए है और जिन्होंने अपने अवदब दान किये है। अगर आपका प्रत्यारोपण मान्य किया गया है और आपके पास कोई जिवित दाता नही है अथवा आप जिवित दाता के त्वारे में अनिश्चित है, आपको मृत शरीर दाता के प्रतीक्षा सूची में शामिल किया जायेगा। एक बार आपको प्रत्यारोपण के लिए स्वीकास गया, तो आपका नाम रा ष् ट्रीय प्रतीक्षा सूची में शामिल किया जाएगा। जन भी गुर्दे उपलब्ध होता है, उस गुर्दे के सर्वोर्तम आनुवंशिक जोड की खोज की जाती है। जन मिलता है तब उस रुग्ण को सूचीत किया जाता है और प्रत्यारोपण की शल्पक्रिया की जाती है।

मधुमेह और गुर्दे की बीमारी

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मधुमेह क्या है?

डायबिटीस मेलिटस, जिसे डायबिटीस या मधुमेह कहा जाता है, एक बीमारी है, जिसमें आपका शरीर उचित मात्रा में इन्शुलीन (आपके शरीर में शर्करा की मात्रा नियंत्रित करनेवाला हार्मोन) तैयार नही करता अथवा उचित मात्रा में शक्कर का इस्तेमाल नही कर सकता, जिसके परिणाम स्वरुप शर्त्करा का स्तर बढ जाता है, जो शरीर के विविध हिस्सों को हानि पहुँचा सकता है। मधुमेह गुर्दे की बीमारी के मुख्य कारणों में से एक है।



मधुमेह के विभिन्न प्रकार

प्रकार। और प्रकार । ये सामान्य प्रकार है

प्रकार ।मधुमेह सामान्यत: बच्चों में पाया जाता है। इसे अल्पवयस्कों में मधुमेह का प्रारंभ (ज्युवे नाइल आनसेट डायबितीस) मे लिटस) कहा जाता है। इस प्रकार में आपका अग्न्याशय पर्याप्त मात्रा में इन्शुलिन की निर्मिती नही करता और आपको इन्शुलिन के इंजेकशन्स लेने पडते है।

प्रकार ।। ज्यादा सामान्य है, जो सामान्यत : ४० साल से अधिक उम्र के लोगों में पाया जाता है जिसे वयस्क मधुमेह का प्रारंभ (अ@डल्ट आ@नसेट डायबिटीस म@लिटस) कहा जाता है। इसमें आपका अग्न्याशय इन्शुलिन की निर्मिती तो करता है लेकिन आपका शरीर उसे ठीक से इस्तेमाल नही कर सकता । अनेक मामलों में शक्कर का उच्र स्तर उचित आहार लेने से तथा / या दवा की गोलियाँ लेकर नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि कुछ रुग्णों में इन्शुलिन लेने की जरुरत पडती है।

मधुमेह आपके शरीर पर किस तरह असर करता है?

  अनियंत्रित मधुमेह संभवत: शरीरांतर्गत छोटी रक्तवाहिकाओंको हानि पहुँचाना है, जिसका परिणाम त्वचा, नस, मांसपेशियाँ, आँत, ह्रदय, गुर्दे जैसे अवयव तथा कोशिका समूहों पर होता है। मधुमेह ग्रस्त रुग्णों को उच्र रक्तचाप तथा धमनी का ठिन्य हो सकता है, जिससे ह्रदय रोग तथा आँखों में विकृती हो सकती है।

मधुमेह गुरदों पर क्या असर करता है?

कई सालों के मधुमेह के बाद आपके गुर्दे के छन्ने के एकल विक्षत हो जाते है, और आपका खून अच्छी तरह से छान नही सकते। गुर्दे की बीमारी का मतलब आपके गुर्दे की नियमित कार्य करने की, जिससे से एक खून से अपशिट सामग्री को छानना है, क्षमता बदतर हो जाना, जिससे आपके शरीर में ज्यादा पानी तथा नमक बाहर नही फेकेगा, जिससे आपका वजन बढेगा तथा टखने में सूजन आयेगी। मूत्र में पोाक द्रव्य भी दिखाई देंगे।

मधुमेह शरीर में नसों को भी हानि पहुँचाता है। इससें आपको मूत्राशय खाली करने में भी तक लीफ जो सकती है। मूत्राशय के भर जाने के आया दबाव उल्हे प्रभावसे गुरदों को क्षति पहुँचा सकता है। अगर आपके मूत्राशय के अधिक समर्थ तक मूत्र रहना है, तो आपको मूत्रनलिका का रोगाणुसंसर्ग हो सकता है क्योंकि उच्र स्तर की शर्करा युक्त मूत्र में सूक्ष्म जीव जल्दी बदते है।

मधुमेह में गुर्दे की बीमारी के तुरंत तथा दूरगामी लक्षण

  • मूत्र में अल्ब्युपिन – पोष् ाक द्रव्य
  • उच्र रक्तचाप
  • टखना तथा पाँव मे सूजन, पाँव में दर्दभरी एेंठन
  • बार बार मूत्र विसर्जन, विशेष् ा कर रात में
  • खून युरिया नत्र (व्लड युरिया नायट्रोजन (बन)) तथा क्रायटेनीन का खून में उच्र स्तर
  • इन्शुलिना मधुमेह प्रतिबंधक गोलियों की कम जरुरत
  • मार्निंग सिकनेस, मँचलना और उल्टी
  • कमजोरी, पाण्डुरता तथा खून की कमी
  • खुजली

पथरी की बीमारी

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जब मूत्र में से कुछ पदार्थ स्फटिक बना लेते है, जो गुर्दे के अंदर के सतह पर चिपक जाते है, तब पथरी बनती है; अगर ये काफी छोटे ही रह गये, तो वे बिना कोई लक्षण बताये मूत्र से शरीर के बाहर पेंके जाते है। अधिक तर


पथरी मूत्र नलिका में रोगाणुसंसर्ग की वजह से निर्माण होती है। पथरी के निर्माण के कारण

पथरी सामान्यत: निम्नलिखित कारणों में से किसी वजह से हो सकती है।

  • आनुवंशिक स्थिती, जिससे मूत्र में कैल्शियम त्याग किया जाता है।
  • आपके मूत्र में सायट्रेट का कम हुआ स्तर, कैल्शियम की पढरी का कारण बन सकता है।
  • पयाथ्रइड ग्रंती को अधिक कार्यरत करके ज्यादा हार्मोन्स का स्त्राव बहानेवाली कोई बीमारी। इससे आपके मूत्र में कैल्शियम तथा फास्फरस का स्तर बढ जाता है, जिससे पथरी निर्माण हो सकती है।
  • मूत्र मार्ग में रोगाणुसंसर्गता अथवा रुकावट
  • गठिया, जो आम्ल मूत्र का कारण बनती है और युरिक अ@सिड अथवा कैल्शियम पथरी का कारण Uान सकती है।
  • दीर्घकालिक प्रज्वलनकारी बडी आँत की बीमारी (क्रा@न की बीमारी), जिससे आपके मूत्र में आक्सलेट का श्तर बढता है, जिससे कैल्शियम आक्सलेट की पथरी हो सकता है।

कृपया दखल ले, ४०प्रलिशत से अधिक मामलों में कोई स्पष्ट कारण दिखाई नही पडता ।
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पथरी के लक्षण

  पीठ में गुर्दे के क्षेत्र में अथवा आमाशय के नीचले हिस्से में कडा दर्द। म@चलना और उल्टी, मूत्र में खून, मूत्र की वारंवारता तथा रोगाणुसंसर्गता के साथ हो तो ठंडके साथ बुखार। दीर्घकालिक गुर्दे की बीमारी जब गुर्दे का कार्य रुक जाता है, तो गुर्दे नाकामयाब हो जाता है। ज्यादातर गुर्दे की समस्याएँ धीरे धीरे उत्पन्न होती है। आपको कई सालों से खामोश गुर्दे की बीमारी हो

जीर्ण गुर्दे रोग

 

गुर्दे की विफलता तब होती है जब गुर्दे काम करना बंद कर देते हैं। ज्यादातर गुर्दे की समस्या धीरे-धीरे होती है आपके पास सालों से गुर्दे की बीमारी हो सकती है। गुर्दे समारोह की सामान्य हानि को क्रोनिक रिकना फेलर या क्रोनिक किडनी डिसीज (सीकेडी) कहा जाता है, जो अंत चरण की गुर्दे की बीमारी (ईएसआरडी) द्वारा पीछा किया जाता है। लगभग पूर्ण और स्थायी किडनी की विफलता की स्थिति जहां दक्षता का स्तर 10 प्रतिशत से कम है, इसे ईएसआरडी कहा जाता है। जब गुर्दे का कार्य बिगड़ता है, तो कचरे के उत्पादों और अतिरिक्त द्रव शरीर में रहते हैं।
आपकी त्वचा खुजली से शुरू हो सकती है आपके शरीर के कुछ हिस्से द्रव प्रतिधारण के परिणाम के रूप में बढ़ सकते हैं। द्रव की इस प्रतिधारण को ओडेमा कहा जाता है और शरीर के वजन, उच्च रक्तचाप और श्वसन समस्याओं में वृद्धि करने के लिए प्रेरित करेगा। गुर्दे की विफलता भी रक्त की कमी (एनीमिया) और भंगुर हड्डियों की ओर बढ़ सकती है।
पुरानी या स्थायी किडनी क्षति के विपरीत, तीव्र गुर्दे की विफलता तब होती है जब गुर्दे अचानक काम करना बंद कर देते हैं, यह स्थिति अस्थायी है। कारण रोग, चोट, बड़ी शल्य चिकित्सा या जहरीले एजेंट हो सकता है यह आम तौर पर प्रतिवर्ती है


क्या आप (सीकेडी) के लिए जोखिम में हैं?

हाँ, यदि आपके पास है,

  • उच्च रक्त चाप
  • मधुमेह
  • स्टोन डिसऑर्डर
  • मोटापा
  • सीकेडी का पारिवारिक इतिहास
  • यदि आप दर्द निवारक या आयुर्वेदिक भस्मों पर हैं
गुर्दे रोग के कारण:
गुर्दे की विफलता का प्रमुख कारण है उच्च रक्तचाप, मधुमेह, पत्थर के कारण यूरेटिक अवरोध, मुख्य रूप से दर्द हत्यारों और विकिरण दवाओं। कई अन्य स्थितियों में ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (गुर्दे की सूजन) जैसी गुर्दे और पॉलीसिस्टिक किडनी रोग जैसे विरासत में मिली बीमारियों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे कि गुर्दे में कई गुदा बनाते हैं।

आप सभी बिस्तर-गीलीकरण के बारे में जानना चाहते थे

यहां बताया गया है कि आपका शरीर कैसे काम करता है:
यह मूत्र बनाने के लिए गुर्दे की नौकरी है, जो मूत्राशय में ट्यूबों को जाता है मूत्राशय एक पानी के गुब्बारे की तरह है जो मूत्र को पकड़ता है। मूत्राशय में एक मांसपेशियों के दरवाज़े होते हैं जिसमें मूत्राशय अंदर आते हैं। जब मूत्राशय भरा होता है तो यह मस्तिष्क को संदेश भेजता है और मस्तिष्क गेट को खोलने के लिए कहता है। रात में अपने पेशाब के मालिक होने के लिए, सभी भागों को एक साथ काम करना चाहिए।

  • · गुर्दे को सिर्फ मूत्र की सही मात्रा बनाना चाहिए
  • · मूत्राशय को इसे पकड़ना चाहिए और जब यह भरा होता है तो मस्तिष्क को बताए
  • · तो मस्तिष्क या तो गेट को सुबह तक बंद रहने के लिए कहें, या आपको जागने के लिए कहें ताकि आप बाथरूम में जा सकें

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